maharshi daanand saraswati

महार्षि दयानंद सरस्वती

✨ महार्षि दयानंद सरस्वती के प्रेरणादायी विचार ✨

“सत्य ही ईश्वर है, और सत्य का अनुसरण ही मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म है।”

“वेदों की ओर लौटो – यही मानवता का कल्याण है।”

“जो स्वयं उजाला बने, वही दुनिया को प्रकाश दे सकता है।”

“सच्चा ज्ञान वही है, जो मनुष्य को निर्भय और स्वावलंबी बनाता है।”

“भक्ति का अर्थ अंधविश्वास नहीं, सत्य की खोज है।”

“समाज का उत्थान शिक्षा, सत्य और परिश्रम से ही संभव है।”

सत्य ही परम धर्म है।

ॐ भूर्भुवः स्वः। तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्।"

ॐ भूर्भुवः स्वः। तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्।"

maharshi dayanand saraswati

✨ चार वेद — सनातन ज्ञान का स्तंभ ✨

१. ऋग्वेद

“ज्ञान, सत्य और प्रार्थना का दिव्य स्रोत।”
मानवता को प्रकाश देने वाले श्रेष्ठ मंत्रों का संग्रह।

२. यजुर्वेद

“कर्म, यज्ञ और जीवन की व्यवस्था का विज्ञान।”
उत्तम कर्म और सदाचार की ओर प्रेरित करने वाला वेद।

३. सामवेद

“संगीत, भक्ति और सामंजस्य का अमृत।”
स्वर, लय और आध्यात्मिक ऊँचाई का अद्वितीय संगम।

४. अथर्ववेद

“आयुर्वेद, शांति और सिद्धि का ज्ञान।”
जीवन, स्वास्थ्य, सुरक्षा और समृद्धि का मार्गदर्शक।

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ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

वैदिक हवन — पवित्र अग्नि में आहुति का दिव्य विज्ञान

वैदिक हवन, ऋषि-परंपरा से चला आ रहा पवित्र अग्नि-संस्कार है, जिसमें वेद-मंत्रों के उच्चारण के साथ घृत, जड़ी-बूटियाँ, समिधा और नैवेद्य अग्नि में समर्पित किए जाते हैं। हवन का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि शुद्ध वातावरण, शांत मन और दिव्य ऊर्जा को जागृत करना है।

हवन में अग्नि को शुद्धि, शक्ति और ज्ञान का प्रतीक माना गया है। वैदिक मान्यता है कि अग्नि देवता मनुष्यों और देवशक्ति के बीच संदेशवाहक का कार्य करते हैं। मंत्रों के स्पंदन और आहुति की सुगंध वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा फैलाती है, जिससे मानसिक, आध्यात्मिक और पर्यावरणीय शांति प्राप्त होती है।

वैदिक हवन के प्रमुख उद्देश्य

  • विचारों और वातावरण की शुद्धि

  • आरोग्य, शक्ति और मानसिक शांति का विकास

  • नकारात्मक ऊर्जाओं का नाश

  • समृद्धि, संतोष और सौभाग्य का आह्वान

  • सदाचार, कर्तव्य और आत्म-विकास की प्रेरणा

  • ईश्वर से एकाग्र भाव से जुड़ने का माध्यम

हवन क्यों आवश्यक माना गया है?

वैदिक ज्ञान कहता है—
“यज्ञो वै श्रेष्ठतमं कर्म”
यानी यज्ञ (हवन) सर्वोत्तम कर्म है, जो मनुष्य के भीतर छिपी दिव्यता को जागृत करता है।

हवन से निकलने वाला धुआँ वातावरण को शुद्ध करता है, और मंत्रों की ध्वनि मन को स्थिर बनाती है। वैज्ञानिक शोध भी बताते हैं कि हवन में प्रयुक्त औषधियाँ वातावरण में एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल प्रभाव उत्पन्न करती हैं।

वैदिक हवन का अंतिम उद्देश्य

अंत में हवन का लक्ष्य है—
मनुष्य के भीतर सत्य, धर्म, ज्ञान और पवित्रता की भावना को स्थापित करना,
ताकि वह स्वयं का उत्थान कर सके और समाज के लिए कल्याणकारी बन सके।

Address

Vedic Arya Samaj Mandir, Sainik Colony,near Dwarika Hopital, Mahilong,Tatisilwsi, Ranchi, Jharkhand (835103)

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